JEE or NEET exams in pendamic


JEE and NEET exams in pendamic 

 हाल ही में supreme court ने एक फैसला करदिया है जिसके दूरगामी परिणाम देखने को मिलने वाले है और ये परिणाम पुरे भारत को प्रभावित करेंगे क्यूंकि supreme court ने साफ़ करदिया है की JEE और NEET की परीक्षा तय समय पर ही होगी  जिसके बाद मानों ऐसा लगने लगा की " आओ कोरोना मुझे मार " 

ये कहावत याद आने लगी और आये भी क्यों न? Supreme court ने आदेश ही ऐसा दे डाला जिसके बाद अधिकांश छात्रों में एक घबराहट सी पैदा हो गयी है और लगातार मुहीम चलाई जा रही है की JEE mains और NEET की परीक्षा को रोक दिया जाये लेकिन कोई भी इन की बात  

को नहीं सुन रहा है लेकिन आज हम सरकार को आईना दिखाएंगे की ऐसी स्थिति में ये exams कराने के क्या भयंकर परिणाम देश को झेलने पड़ सकते है जिससे बची हुई अर्थव्यवस्था भी पूरी तरह ख़त्म हो जाएगी

कितने छात्र लेंगे हिस्सा ? 


सबसे पहले ये जानते है की आखिर कितने छात्र हिस्सा लेंगे इनसब exams में जो आपको बता दे की JEE में 11 लाख छात्रों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है 

और वही बात करें NEET की तो 17 लाख परीक्षार्थी ने करा लिया है registration जो की बहुत ही बड़ी संख्या है

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? 


Supreme court का कहना है की "कोरोना महामारी से हमें लड़ना है पर इसका ये मतलब बिल्कुल भी नहीं की हमें अपनी पढाई को रोकना है ना ही नुकसान करना है हमें निरंतर पढ़ते रहना होगा ये महामारी से अपनी पढाई का नुकसान नहीं होने देंगे"

JEE or NEET exams in pendamic


सुरक्षा व्यवस्था की कड़वी सचाई  


अब एक बात


तो साफ़ है की मुख्य न्यायलय ने अपना आदेश दे दिया अब ऐसे में एक ही पर भरोसा रह जाता है वो है की सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम पर 

वो भी सही से होंगे इसकी क्या गारंटी है हाल ही में हुए B.ed की exam में जो हाल था अगर वो आप देखलो तो यकीनन आपका रहा बचा सुरक्षा व्यवस्था से भी पूर्णतः विश्वास उठ जायेगा ना तो सोशल डिस्टेंस थी ना तो हाथ धुलने की व्यवस्था अब ऐसे में कौन अपनी जिंदगी से खिलवाड़ करेगा


कोरोना के समय JEE और NEET exams देना कितना खतरनाक ? 


आईये अब आपको सच्चाई से भी रूबरू करवा ही देते है हाल ही में आई UN और WHO एक रिपोर्ट 

में ये कहा गया की भारत में 40% से ज्यादा schools में तो साबुन से हाथ धोने की भी कोई व्यवस्था नहीं है और अगर report के अनुसार इस वक्त अगर भारत में स्कूल खोल दिए जाये तो 9 करोड़  छात्र संक्रमित हो सकते है जो डराने वाला आकड़ा है और यही एक बड़ी वजह है भी है की शायद सरकार school को खोलने के बारे में बहुत सोच रही है | 

ताज़ा उदाहरण से समझ लीजिये की जल्दबाजी में America में New York में schools को खोल दिया गया जिससे 97 हजार  बच्चे  कोरोना संक्रमित हो गए  |


इसका solution क्या हो सकता  है? 

हमने समस्याएं तो दिलवा दी लेकिन अब बारी है कि इसका हाल क्या है उसका सलूशन क्या है तो उसका एक ही हाल है और वह हाल है कि सरकार को समझना चाहिए कि ऐसे वक्त पर इस तरह की परीक्षाएं करना खतरे से खाली नहीं होगा और हाल ही में हुए घटनाक्रम से जिस समय कोरोना  के मामले अपनी रफ्तार को छू रहे हैं उस समय ऐसी परीक्षाओं को कराना बहुत ज्यादा जोखिम भरा होने वाला है और ऐसे में इसका एकमात्र हल है कि अभी परीक्षाओं को डाल देना चाहिए माना कि हम यार यह तो नहीं कहेंगे कि जो हम जो कह रहे हैं सरकार मान ले हम किसी तरह का किसी पर दबाव तो नहीं डाल सकते पर हम छात्रों के लिए अपनी आवाज को उठा जरूर सकते हैं अपने प्लेटफार्म से



हमारी राय 

अब ऐसे में हम को भी अपनी राय देने का पूरा मौका है तो इस घटनाक्रम पर हम अपनी राय देना चाहते हैं कि अगर छात्र नहीं चाहते हैं कि ऐसे मौके पर परीक्षा हो तो मुझे नहीं लगता कि एक लोकतांत्रिक देश में किसी भी तरह का छात्रों पर भी दबाव डाला जा सकता है और शायद यही कारण है कि हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और शायद सरकार को भी और समझने की जरूरत है कि इस वक्त परीक्षाएं कराना बहुत बड़ा जोखिम होने वाला है और हम इस मुद्दे पर छात्रों का संपूर्ण समर्थन करते हैं क्योंकि यहां पर जो हमें सही लगता है हम उसका साथ देते हैं हमने दोनों तरह का पक्ष आपको रख दिया लेकिन अब तय आपको करना है कि आपको क्या करना है चाहे तो आप इस पोस्ट को शेयर कर सकते हैं जिससे कि लोगों को और मदद मिले इस मामले में ज्यादा जानकारी जुटाने के लिए और इस को सरकार तक पहुंचाने के लिए भी आप इसे शेयर कर सकते हैं धन्यवाद