Bollywood का एजेंडे वाली सोच का Expose 


आज हम बात करने वाले हैं ऐसे संगठन की जिसे लोग अक्सर बॉलीवुड कहां करता है लोग अक्सर सपनों की दुनिया का करते हैं जिसे लोग अक्सर माया नगरी का करते हैं लेकिन आज हम उसके बाद इस सोच को पर्दाफाश करने वाले हैं जो हमेशा से नौजवानों को लुभाती रही है और लोगों को लगता है कि बॉलीवुड बहुत ही अच्छी जगह है और आज हम उस जगह का असली सच बताने वाले हैं कि कैसे वहां एजेंडा चलता है फिल्में नहीं उससे पहले हम आपको थोड़ा सा इंट्रोडक्शन जरूर देना चाहेंगे आपको याद होगा Bollywood में कभी कोई ऐसी film नहीं बानी जिसको देखने ले बाद हम ये कह सके की ये Hollywood को टक्कर दे सके अब आप एक बात बता दे  कि हमारा मकसद यह नहीं है कि किसी भी को कंपेयर करना और उसके तुलना करना दोनों तरह से तुलना करना सही नहीं है लेकिन यह बात भी बिल्कुल सही है कि बॉलीवुड ने आज तक कोई ऐसी फिल्म भी नहीं दी जल्दी हां कुछ फिल्मों को अगर हम छोड़ दें तो कोई भी ऐसी फिल्म नहीं दी जिससे हम सीधा इसको ग्लोबल लेवल पर परसेंट करवाएं और शायद यही कारण है कि आज बॉलीवुड को धीरे धीरे लोग सही तरीके से पहचानने लगे और अब हम बात करते हैं बॉलीवुड के एजेंडे वाली सोच कि अगर आप अक्सर हॉलीवुड देखते होंगे तो हॉलीवुड में ऐसा कुछ खास नहीं दिखता लेकिन अगर आप बॉलीवुड फिल्म देखते हो पाकिस्तान को भी लुभाने की कोशिश की जाती है और चलते हैंआपको अगर याद हो तो बॉलीवुड की फिल्मों का मूल्य केंद्र बिंदु क्या होता है आपको थोड़ा और समझाएं तो ऐसा समझ लीजिए आसान भाषा में कि बॉलीवुड का केंद्र बिंदु बस प्यार और मोहब्बत ही होता है और इनका केंद्र बिंदु अगर किसी एक ऐसी फिल्मों पर है जैसे कि कोई साइंस फिक्शन लेकिन उस फिल्म में भी इनका यही बिंदु रहता है उस समय तक हो जाना चाहिए पर खेर इसको हम एजेंडे वाली सोच को नाम नहीं दे सकते क्योंकि यह हर फिल्म में दिखाया जाता है हालांकि मुख्य तौर पर नहीं दिखाया जाता है पर फिर भी यह उतना बुरा नहीं है जितना बॉलीवुड के और भी एजेंडे हैं सबसे पहले बात कर लेते हैं बॉलीवुड के पाकिस्तानी झंडे के बारे में आपको याद होगा हाल ही में सलमान खान की एक फिल्म आई थी उसका नाम था टाइगर जिंदा है अगर आपने उनको देखा है तो तो आप जान ही गए होंगे अगर आपने नहीं देखा है तो आपकी जिंदगी बहुत अच्छी है उसे देखना नहीं आपको बता दें उसमें आखरी में पाकिस्तान के साथ हिंदुस्तान का झंडा लहराया गया था अब आप यहीं से अंदाजा लगा लीजिए कि उसमें पाकिस्तान को कितना अच्छा लिखा गया था और क्लाइमैक्स की तो बात ही मत करिए एक तरफ पाकिस्तान का हिंदुस्तान का है लेकिन पाकिस्तान का है अब बात कर लेते हैं और महान कलाकार जिसे कई बड़े-बड़े लोग अपना आदर्श मान चुके हैं आमिर खान के पीके आई थी जिसमें ऐसा एजेंडा था जिसमें हिंदुओं को साफ-साफ गलत दिखाया था अब यहां हमारा मकसद हिंदू मुसलमान का नहीं है लेकिन जब वह सही है उसको बताने के लिए हम इन शब्दों का प्रयोग जरूर करना पड़ेगा और शायद यही कारण है कि हम आपको बता रहे हैं उस फिल्म में हिंदुओं को सरासर गलत लिखा गया था आप उस बाबा के किरदार को ले लीजिए चाहे आप उस नाटक पाल सिंह को ले लीजिए जब भगवान हिंदुओं के भगवान को गलत जगह दिखाया गया था हालांकि बाद में ना तो किसी ने माफी मांगी और तो चली गई और अगर आप ही सोचिए अगर यही चीज किसी और धर्म के लोग के साथ आमिर खान करते तो शायद आज हम लोग ना लिख रहे होते आमिर खान आमिर खान ऊपर को प्यारे हो चुके होते लेकिन इस बार भी कामयाब रही और कहने को तो ऐसे कई उदाहरण हैं लेकिन हम नहीं चाहते कि यहां आए और बॉलीवुड का एक और एजेंडा है जो आपको जरूर बताना चाहिए नेपोटिज्म यानी परिवारवाद बॉलीवुड कभी भूल नहीं पाएंगे यहां पर ऐसे टैलेंटेड एक्ट्रेस को तो कुछ मिलता नहीं है नहीं मिलती है बल्कि और ढंग से बोलना नहीं आती इससे अंदाजा लगा लीजिए और अगर हम थोड़ा और इसकी रहते हैं आपको आना है आपको बताने की जरूरत नहीं हैआपको याद होगा एक फिल्म आई थी कुर्बान जिसमें सैफ अली खान एक्टर थे लीडिंग रोल में और आपको याद होगा उसमें वह आतंकवादी बने थे ख्याल में आतंकवादी बनने से कोई किसी को भी ऐतराज नहीं था लेकिन उसमें आतंकवादियों को तो ऐसा दिखाया गया था यह दुनिया के सबसे बड़े अवेंजर हैं और यह धरती के लिए जान दे देंगे नहीं यकीनन आप अगर वह फिल्म देखते हैं खैर आपने देखी जरूर होगी काफी पुरानी फिल्म है मैं आपको उनका और आतंकवादियों को दिखाया गया आप भी आतंकवादी बनने के लिए बैठ जाएंगे तो आपको क्या लगता है कि बॉलीवुड में जरूर बताइए और सबसे बड़े होते हैं और आज हम बात करने वाले हैं थोड़ी सी देर के लिए बॉलीवुड का एक और एजेंडा हां कीजिए एजेंडा फीमेल एक्ट्रेस चलाती हैं क्योंकि यह एजेंडा बहुत ही सादा क्रिटिकल है और इसको चलाना नहीं चाहिए इसको तो बिल्कुल ही जगह एजेंडा ही नहीं चलाना चाहिए इस टाइप के पर चलाते हैं तो क्या कर सकते हैं बॉलीवुड हैप्पी शर्म है क्या कर सकते हैं बात कर लेते हैं एजेंडे में शामिल है सोनम कपूर और भी कई एक्ट्रेस अब शायद में नाम ना बता पाओगे कि मुझे नाम नहीं आ गए क्योंकि मैं ज्यादा देखता नहीं हूं बॉलीवुड में छोड़ दिया है देखना एक समय था जब मैं भी देखा करता था और यह एजेंडा होता है वूमेन एंपावरमेंट का यही बॉलीवुड जो आइटम सॉन्ग कराते सबसे ज्यादा बेशर्मी को दिखाता है और यही बात करता है वूमेन एंपावरमेंट कि अब आप समझ गए होंगे मैं क्या बात कर रहा हूं जब भी भारत में कोई फेमस रेप केस होता है तो सोनम कपूर जैसी एक्ट्रेस अपने आप को लिबरल मानने वाली और तो और स्वरा भास्कर जैसी इनकी आईडियोलॉजी तो जीरो है आइक्यू जीरो है पर फिर भी अपने आप को लेवल मानने वाली खड़ी हो जाती है एक बोर्ड लेकर सॉरी आई एम आई ashemed हिंदुस्तान